गांव की मिट्टी में रची-बसी आस्था और परंपरा का एक और अनुपम उदाहरण हाल ही में देखने को मिला, जब पूरे श्रद्धा, उल्लास और अनुशासन के साथ ‘श्री कोयला वीर बाबा’ की पूजा का आयोजन संपन्न हुआ। यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक भावना से जुड़ा था, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक गौरव और युवा शक्ति की एक प्रेरणादायक मिसाल भी बन गया।
इस बार आयोजन सोपाइँ गांव में हुआ
हर वर्ष होने वाली यह पूजा इस बार सोपाइँ गांव में आयोजित की गई थी। आयोजन की खास बात यह रही कि यहां के साहनी परिवार के युवाओं ने इसकी पूरी जिम्मेदारी संभाली और उसे सफलता तक पहुंचाया। गांव के अन्य युवाओं ने भी बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई और कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।
ग्राम देवता की पूजा में उमड़ा जनसैलाब
श्री कोयला वीर बाबा, जिन्हें उत्तर प्रदेश और बिहार के मल्लाह समुदाय में ग्राम देवता के रूप में पूजा जाता है, उनके प्रति असीम श्रद्धा इस आयोजन में स्पष्ट झलकी। यह पूजा हर वर्ष होती है, लेकिन इस बार का आयोजन विशेष रूप से भव्य रहा। अनुमानतः आठ से दस हज़ार लोगों की उपस्थिति ने इसे एक ऐतिहासिक आयोजन बना दिया।
पूजा के दौरान गांव का पूरा नदी किनारा भव्य टेंटों और सजावटों से सजा हुआ था। खेतों को समतल कर भंडारे और झांकी की व्यवस्था की गई थी। आयोजन के लिए 80,000 रुपये का टेंट, 26 गैस सिलिंडर, भंडारे के लिए सैकड़ों किलो अनाज और सामूहिक सहयोग जुटाया गया।
युवा शक्ति ने संभाली कमान
पूरे आयोजन की सबसे विशेष बात यह रही कि गांव के साहनी परिवार के युवाओं ने इसकी पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई। पूजा स्थल की साफ-सफाई से लेकर सजावट, भंडारे की व्यवस्था, पुलिस परमिशन, पोस्टर-बैनर और एसडीएम की अनुमति तक—हर कार्य को युवाओं ने समर्पण और अनुशासन के साथ निभाया। इस आयोजन को सफल बनाने में सोपाइँ के ही रहने वाले गुलाबजी ने मुंबई में रहते हुए भी महत्वपूर्ण मदद की।
सामाजिक सहयोग और समरसता का उत्सव
पूरे गांव ने इस आयोजन को अपने उत्सव की तरह मनाया। गांव के हर घर ने किसी न किसी रूप में योगदान दिया—किसी ने गेहूं दान दिया, किसी ने आर्थिक सहयोग किया। गुलाब जी ने बताया, “यह केवल पूजा नहीं थी, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना का उत्सव था। हमारे गांव की एकता ही इसकी असली शक्ति है।”
भंडारा और झांकी ने बढ़ाया उत्साह
शुक्रवार को भव्य पूजा के बाद विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें सैकड़ों ग्रामीणों ने प्रसाद ग्रहण किया। इसके अगले दिन निकाली गई कोयला वीर बाबा की झांकी ने माहौल को भक्तिमय कर दिया।
Source: Gulab Singh
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