गायघाट–बभनोली–बेलघाट मार्ग की बदहाल सड़क बनी सैकड़ों ग्रामीणों की परेशानी, जल्द मरम्मत की उठी मांग

बेलघाट/गोरखपुर। विकासखंड बेलघाट के अंतर्गत गायघाट–बभनोली–बेलघाट मार्ग की जर्जर स्थिति क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीणों के लिए गंभीर समस्या बन गई है। सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे, बारिश के कारण जलभराव और टूटी हुई सतह के कारण लोगों का आवागमन जोखिम भरा हो गया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार यह मार्ग केवल एक गांव की नहीं, बल्कि आसपास के 15 से 20 गांवों की प्रमुख संपर्क सड़क है। प्रतिदिन इसी रास्ते से ग्रामीण बेलघाट थाना, विकासखंड कार्यालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), बाजार, विद्यालय तथा अन्य सरकारी कार्यालयों तक पहुंचते हैं। सड़क की बदहाल स्थिति के कारण किसानों, व्यापारियों, छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और मरीजों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

बरसात के मौसम में सड़क पर पानी भर जाने से कई स्थानों पर गड्ढे दिखाई नहीं देते, जिससे दोपहिया वाहन चालकों के फिसलने और दुर्घटना होने का खतरा लगातार बना रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई लोग चोटिल भी हो चुके हैं। वहीं एम्बुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाओं के लिए भी इस मार्ग से गुजरना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की खराब स्थिति का असर केवल आवागमन तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, किसानों की कृषि गतिविधियों और स्थानीय व्यापार पर भी पड़ रहा है। कई अभिभावक बताते हैं कि बारिश के दिनों में बच्चों का समय पर स्कूल पहुंचना कठिन हो जाता है।

क्षेत्र के लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि सड़क का तकनीकी निरीक्षण कराकर जल्द से जल्द स्थायी मरम्मत या पुनर्निर्माण कराया जाए। उनका कहना है कि केवल गड्ढों में ईंट, गिट्टी या राबिश डालने से अस्थायी राहत तो मिल सकती है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।

ग्रामीणों ने यह भी कहा कि यह सड़क क्षेत्र की जीवनरेखा है और इसके बेहतर होने से हजारों लोगों को राहत मिलेगी। उन्होंने लोक निर्माण विभाग (PWD), जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से प्राथमिकता के आधार पर आवश्यक कार्रवाई करने की अपील की है।

Belghat.com क्षेत्र की जनसमस्याओं को जिम्मेदारी के साथ संबंधित विभागों और प्रशासन तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा उद्देश्य केवल समस्याओं को उजागर करना नहीं, बल्कि उनके समाधान की दिशा में सकारात्मक संवाद को बढ़ावा देना है।

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