15 साल बाद घर लौटा बेटा, पिता का हौसला आखिर जीत गया

गोरखपुर के बेलघाट निवासी विश्वनाथ 2011 में रोजी-रोटी कमाने मुंबई गए थे, ठेकेदार से विवाद के बाद हो गए थे लापता

उरुवा बाजार/बेलघाट। गोरखपुर जिले के बेलघाट थाना क्षेत्र के जिगिनिया शाहपुर गांव निवासी 80 वर्षीय रामेनन का 15 साल लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हो गया। वर्ष 2011 में रोजी-रोटी कमाने मुंबई गए उनके बेटे विश्वनाथ साहनी बुधवार को परिवार के बीच वापस लौट आए। बेटे के लौटने की खबर से पत्नी निर्मला, बच्चों और बुजुर्ग पिता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

विश्वनाथ के घर लौटने की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। करीब 15 साल पहले वह काम की तलाश में मुंबई गए थे। शुरुआती करीब तीन महीने तक परिवार से उनका संपर्क बना रहा और वह घर खर्च के लिए रुपये भी भेजते रहे। इसके बाद अचानक उनका फोन आना बंद हो गया।

परिवार के अनुसार, मुंबई के ठेकेदार ने बताया था कि विश्वनाथ घर चले गए हैं और उनकी मजदूरी के करीब चार हजार रुपये भेजने की बात भी कही थी। रुपये तो परिवार को मिल गए, लेकिन विश्वनाथ का कोई पता नहीं चला। इसके बाद उनके बुजुर्ग पिता रामेनन और परिवार ने उन्हें खोजने के लिए हरसंभव प्रयास किया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।

ठेकेदार से विवाद के बाद मुंबई से निकले थे

विश्वनाथ ने परिवार को बताया कि मुंबई में वह ठेकेदार से अपनी मजदूरी के रुपये मांग रहे थे। ठेकेदार ने रुपये नहीं दिए तो नाराज होकर वह पैदल ही मुंबई से निकल पड़े और नागपुर पहुंच गए। इसके बाद वह कोलकाता कैसे पहुंचे, इसकी उन्हें पूरी जानकारी याद नहीं है।

पुलिस के मुताबिक, कोलकाता में कुछ लोगों ने उन्हें एक आश्रम जैसी संस्था तक पहुंचाया, जहां उनका इलाज और देखभाल की गई। हालत में सुधार होने के बाद विश्वनाथ ने संस्था को अपने घर का पता बताया।

15 साल तक नहीं टूटा पिता का भरोसा

विश्वनाथ के परिवार के लोग उनकी तलाश करते-करते थक चुके थे। इस दौरान उनकी मां का वर्ष 2024 में निधन भी हो गया। परिवार को धीरे-धीरे बेटे के वापस आने की उम्मीद कम होती जा रही थी, लेकिन 80 वर्षीय पिता रामेनन ने बेटे के लौटने की उम्मीद कभी नहीं छोड़ी।

उनका विश्वास था कि बेटा जहां भी होगा, एक दिन जरूर वापस आएगा। इसी उम्मीद के सहारे परिवार ने करीब 15 वर्षों तक विश्वनाथ की तलाश जारी रखी।

कोलकाता की संस्था और पुलिस की मदद से हुई पहचान

संदीप यादव के अनुसार, कोलकाता की पुलिस और वहां की ईश्वर संकल्प नामक संस्था ने बेलघाट पुलिस से संपर्क किया। संस्था की ओर से विश्वनाथ की तस्वीर और लोकेशन पुलिस के साथ साझा की गई। पुलिस ने फोटो के आधार पर परिवार से संपर्क किया और पहचान की पुष्टि की।

पहचान होने के बाद विश्वनाथ की पत्नी निर्मला, बेटी रोशनी और रिश्तेदार सीताराम कोलकाता के हावड़ा पहुंचे। संस्था के सदस्यों ने उन्हें विश्वनाथ से मिलवाया। इसके बाद कालियाघाट पुलिस की मौजूदगी में विश्वनाथ को परिवार के सुपुर्द कर दिया गया।

बुधवार को परिवार विश्वनाथ को लेकर गोरखपुर लौट आया। हालांकि, विश्वनाथ अभी पूरी तरह स्वस्थ नहीं हैं और बातचीत के दौरान कई पुरानी बातें भूल जाते हैं, लेकिन 15 साल बाद उनका अपने परिवार के बीच लौटना पूरे परिवार के लिए बेहद भावुक और खुशी का पल है।

Source: Paper Cutting – Amarujaala (Apana Belghat – Whatsapp Group)

 

 

 

 

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